पासपोर्ट वेरिफिकेशन के बदले नियम! अब नहीं लगाने होंगे थाने के चक्कर – जानें नई प्रक्रिया

गाजियाबाद में पासपोर्ट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अब और सरल हो गई है। बीट कॉन्स्टेबल घर जाकर दस्तावेज़ लेंगे और वहीं वेरिफिकेशन पूरा करेंगे। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि अवैध उगाही की घटनाओं में भी कमी आएगी। यह पहल पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और आम नागरिक की सुविधा की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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पासपोर्ट वेरिफिकेशन के बदले नियम! अब नहीं लगाने होंगे थाने के चक्कर – जानें नई प्रक्रिया
पासपोर्ट वेरिफिकेशन के बदले नियम

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने पासपोर्ट पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर एक बड़ी पहल की है, जिससे इस प्रक्रिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सहज और पारदर्शी बनाया जा रहा है। अब पासपोर्ट के लिए आवेदन करने वाले लोगों को थाने के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। पुलिस खुद व्यक्ति के घर जाकर जरूरी दस्तावेज इकट्ठा करेगी और वहीं पर वेरिफिकेशन के लिए हस्ताक्षर भी करवाएगी। यह बदलाव गाजियाबाद के नागरिकों के लिए न केवल समय की बचत का जरिया बनेगा, बल्कि पुलिस द्वारा होने वाली कथित उगाही पर भी रोक लगाएगा।

बीट कॉन्स्टेबल निभाएंगे अहम भूमिका

नई प्रणाली के तहत प्रत्येक बीट कॉन्स्टेबल को उनके क्षेत्र में पासपोर्ट वेरिफिकेशन की ज़िम्मेदारी दी गई है। अब पासपोर्ट ऑफिस से वेरिफिकेशन के लिए आने वाली फाइलें सीधे बीट कॉन्स्टेबल को सौंपी जाएंगी, जो संबंधित व्यक्ति के घर जाकर उसकी पहचान की पुष्टि करेंगे, दस्तावेज़ लेंगे और मौके पर ही हस्ताक्षर करवाएंगे। इसके बाद ये दस्तावेज़ थाने में जमा किए जाएंगे। यह नई व्यवस्था मोदीनगर सर्किल समेत मुरादनगर, निवाड़ी और भोजपुर जैसे क्षेत्रों में शुरू हो चुकी है, जहां प्रतिदिन करीब 30 से 40 वेरिफिकेशन केस आते हैं।

पुरानी व्यवस्था में थी असुविधा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश

पहले की प्रणाली में आवेदकों को थाने बुलाकर उनके दस्तावेज़ लिए जाते थे। कई बार इस दौरान लोगों को अनावश्यक रूप से पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे समय और संसाधनों की बर्बादी होती थी। इसके अतिरिक्त, थानों में पासपोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर अवैध वसूली की भी कई शिकायतें सामने आती थीं। 500 से 1000 रुपये तक की राशि वेरिफिकेशन के नाम पर ली जाती थी। नई व्यवस्था से इस प्रकार के भ्रष्टाचार की संभावना को काफी हद तक खत्म किया जा सकेगा।

अधिकारी क्या कहते हैं?

मोदीनगर के एसीपी ज्ञान प्रकाश राय ने बताया कि बीट कॉन्स्टेबल द्वारा वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी उठाए जाने से यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन गई है। उन्होंने बताया कि थाने के सभी प्रभारियों को इस बारे में निर्देश दे दिए गए हैं और इस नई व्यवस्था को पहले ही लागू किया जा चुका है।

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